Saturday, September 11, 2021

तालिबान आन्दोलन

 अफ़ग़ानिस्तान में ऐसा क्या है जो इसे पूरी दुनिया में 'साम्राज्यों की कब्रगाह' के रूप में जाना जाता है? आख़िर क्यों अमेरिका से लेकर ब्रिटेन, सोवियत संघ समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियां इसे जीतने की कोशिश में नाकाम रहीं.

ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब अफ़ग़ानिस्तान के इतिहास और भूगोल में मिलता है.

19वीं सदी में, तब दुनिया में सबसे ताक़तवार रहे ब्रितानी साम्राज्य ने अपनी पूरी शक्ति के साथ इसे जीतने की कोशिश की. लेकिन 1919 में आख़िरकार ब्रिटेन को अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जाना पड़ा और उन्हें स्वतंत्रता देनी पड़ी.

इसके बाद सोवियत संघ ने 1979 में अफ़ग़ानिस्तान पर आक्रमण किया. मंशा ये थी कि 1978 में तख़्तापलट करके स्थापित की गयी कम्युनिस्ट सरकार को गिरने से बचाया जाए. लेकिन उन्हें ये समझने में दस साल लगे कि वे ये युद्ध जीत नहीं पाएंगे.

तालिबान

  • तालिबान (पश्तो भाषा में ‘छात्र’) 1990 के दशक की शुरुआत में अफगानिस्तान से सोवियत सैनिकों की वापसी के बाद उत्तरी पाकिस्तान में उभरा एक आतंकवादी संगठन है।
  • वर्तमान में यह अफगानिस्तान में सक्रिय एक इस्लामी कट्टरपंथी राजनीतिक और सैन्य संगठन है। यह काफी समय से अफगान राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण स्थिति में था।
  • तालिबान बीते लगभग 20 वर्षों से काबुल में अमेरिकी समर्थित सरकार के खिलाफ लड़ रहा है। वह अफगानिस्तान में इस्लाम के सख्त रूप को फिर से लागू करना चाहता है।
  • आतंकवादी हमले
    • 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे।
    • इस हमले के लगभग एक महीने बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान (ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम) के खिलाफ हवाई हमले शुरू कर दिये।

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